PM MODI ने आदि शंकराचार्य को दी श्रद्धांजलि, अद्वैत दर्शन पर जोर

Tue 21-Apr-2026,06:12 PM IST +05:30

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PM MODI ने आदि शंकराचार्य को दी श्रद्धांजलि, अद्वैत दर्शन पर जोर Adi-shankaracharya-jayanti-pm-modi-tribute
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदि शंकराचार्य जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए अद्वैत वेदांत दर्शन को मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया और एकता पर जोर दिया।

  • शंकराचार्य के उपदेशों में सत्य, करुणा और सामूहिक कल्याण के सिद्धांतों को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणादायक बताया गया।

  • देशभर में मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और प्रवचन आयोजित कर आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं को याद किया गया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ देशभर में आज आदि शंकराचार्य जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महान दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु आदि शंकराचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और अद्वैत वेदांत दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि शंकराचार्य के उपदेश आज भी मानवता को एकता, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में लिखा कि आदि शंकराचार्य भारत के महानतम आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे, जिनके विचारों ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अद्वैत वेदांत का सिद्धांत सभी के अस्तित्व की एकात्मकता को दर्शाता है और समाज में सद्भावना तथा अनुशासन को मजबूत करता है।

श्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में देशभर में कई आध्यात्मिक केंद्र स्थापित कर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रयासों ने आध्यात्मिक चिंतन को नई ऊर्जा दी और समाज को एक सूत्र में पिरोने में अहम भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य का ज्ञान और दर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा। उनके विचार सत्य, करुणा और सामूहिक कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हैं।

देशभर में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आदि शंकराचार्य को याद किया जा रहा है। मंदिरों और आश्रमों में विशेष पूजा-अर्चना और प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। विद्वानों और संतों ने भी उनके अद्वैत दर्शन की महत्ता पर प्रकाश डाला और इसे आधुनिक समय में भी प्रासंगिक बताया।